Geeta Saar in Hindi | गीता सार हिंदी में

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भगवान श्रीकृष्ण ने मोक्षदा शुक्‍ल एकादशी के दिन महान धनुर्धारी पांडु पुत्र अर्जुन को द्वापर युग में कुरुक्षेत्र के मैदान में जो उपदेश दिया था वह भगवत गीता है. ऐसा माना जाता है कोई व्यक्ति अपने मार्ग से भटके या फिर उसे कोई रास्ता दिखाने वाला न मिले तो गीता के उपदेश अवश्‍य ही उसे रास्‍ता दिखाएंगे . इतना वक्त बित गया हैं लेकिन गीता के उपदेश आज भी हमारे जीवन में उतने ही प्रासंगिक हैं। तो चलो आगे पढ़ते हैं गीता सार –

Geeta Saar in Hindi | गीता सार हिंदी में 

* क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सकता है? आत्मा ना पैदा होती है, न मरती है.

* जो हुआ, वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा. तुम भूत का पश्चाताप न करो. भविष्य की चिन्ता न करो. वर्तमान चल रहा है.

* तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? न तुम कुछ लेकर आए, जो लिया यहीं से लिया. जो दिया, यहीं पर दिया. जो लिया, इसी (भगवान) से लिया. जो दिया, इसी को दिया.

* खाली हाथ आए और खाली हाथ चले. जो आज तुम्हारा है, कल और किसी का था, परसों किसी और का होगा. तुम इसे अपना समझ कर मग्न हो रहे हो. बस यही प्रसन्नता तुम्हारे दु:खों का कारण है.

* परिवर्तन संसार का नियम है. जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है. एक क्षण में तुम करोड़ों के स्वामी बन जाते हो, दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो. मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो. * न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो. यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है और इसी में मिल जाएगा. परन्तु आत्मा स्थिर है – फिर तुम क्या हो?

* तुम अपने आपको भगवान को अर्पित करो. यही सबसे उत्तम सहारा है. जो इसके सहारे को जानता है वह भय, चिन्ता, शोक से सर्वदा मुक्त है.

* जो कुछ भी तू करता है, उसे भगवान को अर्पण करता चल. ऐसा करने से सदा जीवन-मुक्त का आनंन्द अनुभव करेगा

Srimad Bhagavad Geeta Saar

Kyo vyarth ki chinta karte ho? Kis se vyarth darte ho? Kaun tumhe maar sakta hain? Aatma na paida hoti hain, na marti hain.

• Jo hua wo acha hua, jo ho raha hain, vah acha ho raha hain, jo honga, vah bhi acha hi hoga. Tum bhoot ka pashchatap na karo,bhavishya ki chinta na karo. Vartman chal raha hain.

• Tumhara kya gaya, jo tum rote ho? Tum kya laye the, jo tumne kho diya? Tumne kya paida kiya tha, jo nash ho gaya? Na tum kuch lekar aaye, jo liya yahi se liya. Jo diya, yahi par diya. Jo liya, bhagavan se liya. Jo diya isi ko diya.

• Khali hath aaye aur khali hath chale. Jo aaj tumhara hain, kal kisi ka tha, parso kisi aur ka hoga. Tum ese apna samajh kar magn ho rahe ho. Bas yahi prasannata tumhare dukho ka karan hai.

• Parivartan sansar ka niyam hai. Jise tum mrutyu samajhate ho, vahi to jivan hain. Ek shanr me tum karodo ke swami ban jate ho, dusare hi kshan me tum daridr ho jate ho. Mera – tera, chota – bada, apna – paraya man se mita do, phir sab tumhara hain, tum sabke ho.

• Na yah sharer tumhara hai, na tum sharer ke ho. Yah agni, jal, vayu, pruthvi, aakash se bana hain aue asi me mil jayega. Parantu aatma sthir hain – phir tum kya ho?

• Tum apne aapko bhagavan ko arpit karo. Yahi sabse uttam sahara hai. Jo iske sahare ko janata hai vah bhay, chinta, shok se sarvda mukt hai.

• Jo kuch bhi tu karata hai, use bhagavan ko arpan karta chal. Aisa karne se sada jivan-mukt ka aanand anubhav karega.

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