Why Tulsi is not offered to Ganesh Puja (गणेश जी की क्या दुश्मनी है तुलसी से….)

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Ganes Tulsi

हिन्दू धर्म में तुलसी को एक पवित्र  तथा माता स्वरुप  माना जाता है | यह  भगवान  विष्णु की पूजा के लिए व्यापक रूप से इस्तमाल किया जाता है। तुलसी में कई औषधीय गुण  भी  हैं | तुलसी के पत्तो  को मृत व्यक्ति के मुंह में  इस विश्वास के साथ रखा जाता है कि वह व्यक्ति  को वैकुण्ठ या भगवान विष्णु के निवास स्थान पर पहुँच जाएगा |  गणेश जी की पूजा  मे  अनेक प्रकार के फूल , मिठाई और फल   चढ़ाते  है पर तुलसी नहीं |  क्या आप जानते हैं की विष्णु प्रिय तुलसी को भगवान गणेश की पूजा में निषेध माना जाता है आखिर ऐसा  क्यो ? हिंदू मान्यताओं के मुताबिक इसके पीछे एक कथा  है। 

 तुलसी एक  समय लड़की  हुआ करती थी | बचपन से ही वो भगवान नारायण  की पूजा में लीन रहती थी और एक दिन सुन्दर बगिया में खुशबूदार पेड़ों के पास किशोर गणेश गंगा किनारे तप कर रहे थे | भगवान गणेश ने अपने शरीर पर चन्दन का लेप लगाये  गले में पारिजात पुष्पों के साथ स्वर्ण-मणि रत्नों के अनेक हार पहने और कमर पर कोमल रेशम का पीताम्बर पहने हुए रत्न जटित सिंहासन पर विराजमान थे| गणेश के इस रूप को देखकर वहीं, नवयौवना कन्या तुलसी मोहित हो गयी और उनके सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। मोहित तुलसी ने अपने विवाह की इच्छा बताने के लिए गणेश जी का ध्यान भंग कर दिया तथा उनके सामने अपनी इच्छा प्रकट करी| भगवान गणेश ने देवी तुलसी को कहा  की तुमने मेरी तपस्या भंग करके अशुभ कार्य किया है तथा मैं विवाह नही कर सकता, मैं तो वह ब्रम्हचर्य जीवन व्यतीत  करना चाहता हु| 

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गणेश के अस्वीकार से देवी तुलसी बहुत दुखी हुई और उनको क्रोध आ गया तथा आवेश में आकर ही उन्होंने भगवान गणेश को श्राप दे दिया की उनके दो विवाह होंगे| हालांकि गणेश जी बहुत ही उदार है पर तुलसी के इस व्यवहार से गणेश जी कुपित हो उठे और उन्‍होंने ने भी तुलसी को श्राप  दे दिया कि तुम्हारा शादी  एक दानव से होगी और बहुत  कष्ट भुगतना पड़ेगा। एक राक्षस से शादी होने का श्राप  सुनकर वो शांत हो गयीं और  उन्‍हें अपनी गलती का अहसास हुआ। तब उन्‍होंने भगवान  गणेश से माफ़ी   मांगी। 

तब भगवान गणेश जी ने तुलसी को क्षमा करते हुए  कहा श्राप के अनुसार उसकी शादी शंखचूर्ण राक्षस से होगी पर एक जीवन के बाद अगले जीवन में वह पेड़ बन जायेगी| उसके बाद सब में वह अपने अद्भुत औषधीय गुण के कारण तुम सारे जगत में जानी जायेगी और भगवान विष्णु की प्रिय होगी| तुलसी के चढ़ावे के बिना भगवान विष्णु की कोई भी पूजा पूरी नहीं होगी | । तुम्हारी पूजा की जाएगी और तुम्हे जीवन और मोक्ष देने वाली माना जाएगा पर मेरी पूजा में  तुम्हारा उपयोग शुभ नहीं माना जाएगा।

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यही कारण है भगवान श्री गणेश जी की पूजा में तुलसी नहीं  चढाई जाती |

 

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